चाँद से मुतअ़ल्लिक़ कुछ ज़रूरी मसाइल
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*🥀 चाँद से मुतअ़ल्लिक़ कुछ ज़रूरी मसाइल 🥀*
🔛 स़ह़ीह़ैन में ह़ज़रते अबू हुरैरह رضی الله عنہ से मरवी, ह़ुज़ूरे अक़दस ﷺ फ़रमाते हैं चाँद देख कर रोज़ह रखना शुरूअ़् करो और चाँद देख कर इफ़्त़ार करो और अगर अब्र हो तो शअ़्बान की गिन्ती तीस पूरी करलो
*📚 बहारे शरीअ़त, जिल्द 1, ह़िस़्स़ह 5, पेज 973, ह़दीस 2*
स़ह़ीह़ मुस्लिम में अबिल बख़्तरी से मरवी, कहते हैं हम उ़मरह के लिए गए, जब बत़ने नख़्लह में पहुँचे तो चाँद देख कर किसी ने कहा तीन रात का है, किसी ने कहा दो रात का है इब्ने अ़ब्बास رضی الله عنہما से हम मिले और उन से वाक़िअ़ह बयान किया, फ़रमाया तुम ने देखा किस रात में हम ने कहा, फ़ुलां रात में, फ़रमाया कि रसूलुल्लाह ﷺ ने उसकी मुद्दत देखने से मुक़र्रर फ़रमाई, लिहाज़ा उस रात का क़रार दिया जाएगा जिस रात को तुम ने देखा
*📚 बहारे शरीअ़त, चाँद देखने का बयान, ह़दीस 6*
पाँच महीनों का चाँद देखना, वाजिबे किफ़ायह है: ❶ शअ़्बान - ❷ रमज़ान - ❸ शव्वाल - ❹ ज़ी-क़अ़्दह - ❺ ज़िल-ह़िज्जह - ① शअ़्बान का इस लिए कि अगर रमज़ान का चाँद देखते वक़्त अब्र या ग़ुबार हो तो येह तीस पूरे करके रमज़ान शुरूअ़् करें और ② रमज़ान का रोज़ह रखने के लिए और ③ शव्वाल का रोज़ह ख़त्म करने के लिए और ④ ज़ी-क़अ़्दह का ज़िल-ह़िज्जह के लिए और ⑤ ज़िल-ह़िज्जह का बक़रई़द के लिए
*📚 बहारे शरीअ़त, चाँद देखने का बयान, मस्अलह 1*
शअ़्बान की उन्तीस को शाम के वक़्त चाँद देखें दिखाई दे तो कल रोज़ह रखें, वर्नह शअ़्बान के तीस दिन पूरे करके रमज़ान का महीनह शुरूअ़् करें
*📚 बहारे शरीअ़त, चाँद देखने का बयान, मस्अलह 2*
एक जगह चाँद हुवा तो वोह स़िर्फ़ वहीं के लिए नहीं, बल्कि तमाम जहान के लिए है मगर दूसरी जगह के लिए इसका ह़ुक्म उस वक़्त है कि उनके नज़दीक उस दिन तारीख़ में चाँद होना शरई़ सुबूत से साबित हो जाए {¹} यअ़्नी देखने की गवाहू या क़ाज़ी के ह़ुक्म की शहादत गुज़रे या मुतअ़द्दिद जमाअ़तें वहाँ से आकर ख़बर दैं कि फ़ुलां जगह चाँद हुवा है और वहाँ लोगों ने रोज़ह रखा या ई़द की है
*📚 बहारे शरीअ़त, चाँद देखने का बयान, मस्अलह 26*
तार या टेलीफ़ोन से रूयते हिलाल नहीं साबित हो सकती, न बाज़ारी अफ़वाह और जंत्रियों और अख़बारों में छपा होना कोई सुबूत है आज कल उ़मूमन देखा जाता है कि उन्तीस रमज़ान को ब-कसरत एक जगह से दूसरी जगह तार भेजे जाते हैं कि चाँद हुवा या नहीं, अगर कहीं से तार आ गया बस लो ई़द आ गई येह मह़्ज़ नाजाइज़ व ह़राम है
*📚 बहारे शरीअ़त, चाँद देखने का बयान, मस्अलह 27*
हिलाल (चाँद) देख कर उसकी त़रफ़ उंगली से इशारह करना मकरूह है (क्योंकि येह अहले जाहिलिय्यत का अ़मल है), अगर्चे दूसरे को बताने के लिए हो
*📚 बहारे शरीअ़त, चाँद देखने का बयान, मस्अलह 28*
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