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*🥀 ईदुल फ़ित्र स-द-कए फ़ित्र 🥀*
*पोस्ट- 12*
*🎊 मुआफ़ी का ए'लाने आम :*
अल्लाह का करम बालाए करम है कि उसने माहे रमज़ानुल मुबारक के फौरन ही बा'द हमें ईदुल फित्र की ने मते उज्मा से सरफ़राज़ फ़रमाया इस ईदे सईद की बेहद फजीलत है
🎊 लेकिन हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास رضی اللہ تعالی عنہ की एक रिवायत में येह भी है :
🎊 जब ईदुल फित्र की मुबारक रात तशरीफ़ लाती है तो इसे " लैलतुल जाइज़ा ' या'नी " इन्आम की रात " के नाम से पुकारा जाता है
🎊जब ईद की सुब्ह होती है तो अल्लाह अपने मासूम फिरिश्तों को तमाम शहरों में भेजता है
🎊 लेकिन वोह फ़िरिश्ते ज़मीन पर तशरीफ ला कर सब गलियों और राहों के सिरों पर खड़े हो जाते हैं और इस तरह निदा देते हैं
🎊ऐ उम्मते मुहम्मद ﷺ उस रब्बे करीम की बारगाह की तरफ चलो जो बहुत ही ज़ियादा अता करने वाला और बड़े से बड़ा गुनाह मुआफ फरमाने वाला है
🎊 फिर अल्लाह अपने बन्दों से यूं मुखातिब होता है :
🎊ऐ मेरे बन्दो मांगो क्या मांगते हो ?
🎊मेरी इज्जतो जलाल की कसम आज के रोज़ इस ( नमाजे ईद के ) इज्तिमाअ में अपनी आखिरत के बारे में जो कुछ सुवाल करोगे वोह पूरा करूंगा और जो कुछ दुन्या के बारे में मांगोगे उस में तुम्हारी भलाई की तरफ़ नज़र फ़रमाऊंगा
( या'नी इस मुआमले में वोह करूंगा जिस में तुम्हारी बेहतरी हो )
🎊मेरी इज्जत की कसम ! जब तक तुम मेरा लिहाज़ रखोगे मैं भी तुम्हारी खताओं पर पर्दा पोशी फ़रमाता रहूंगा मेरी इज्जतो जलाल की कसम मैं तुम्हें हद से बढ़ने वालों ( या'नी मुजरिमों ) के साथ रुस्वा न करूंगा बस अपने घरों की तरफ मरिफ़रत याफ्ता लौट जाओ तुम ने मुझे राज़ी कर दिया और मैं भी तुम से राजी हो गया
*📚अत्तरगीब वत्तरहीब , जिल्दः 2 , सफ़ह 60 , हदीस : 23 )*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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