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Showing posts from March, 2026

क़ुरआने पाक में नमाज़ और ज़कात का कितने मर्तबा साथ मे ज़िक़्र आया है*3️⃣6️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 36▪️* *📝 सवाल-;* *📇 क़ुरआने पाक में नमाज़ और ज़कात का कितने मर्तबा साथ मे ज़िक़्र आया है* *✍️ जवाब-:* *📇 क़ुरआने पाक में नमाज़ और ज़कात का साथ में कुल 32 मर्तबा ज़िक़्र आया हैं अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया "नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो" लिहाज़ा जिस तरह नमाज़ अहम फ़र्ज़ है उसी तरह ज़कात भी अहम फ़र्ज़ हैं जिसे अल्लाह तआला ने नमाज़ के साथ ज़िक़्र किया है अगर आप पर ज़कात फ़र्ज़ है तो ज़रूर अदा कीजिये उससे आपका माल महफ़ूज़ रहेगा इंशा अल्लाह* 📚 *क़ुरआनुल करीम फुरक़ानूल हमीद* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​*  *क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से* *👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।* *▪ امیــــــن ▪* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* https://cha...

क्या पहनने वाले ज़ेवर पर ज़कात है या नहीं*3️⃣5️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 35▪️* *📝 सवाल-;* *📇 क्या पहनने वाले ज़ेवर पर ज़कात है या नहीं* *✍️ जवाब-:* *📇 पहनने के ज़ेवरात पर भी ज़कात फर्ज़ है* *हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में एक औरत आई उसके साथ उसकी बेटी भी थी, जिसके हाथ में सोने के मोटे मोटे कंगन थे,आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उस औरत से पूछा,क्या तुम इसकी ज़कात अदा करती हो उस औरत ने अर्ज़ की जी नहीं आपने इरशाद फरमाया क्या तुम इस बात से खुश हो कि क़यामत के दिन अल्लाह तआला तुम्हें इन कंगनों के बदले आग के कंगन पहना दे,ये सुनते ही उसने वह कंगन रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के आगे डाल दिए और कहा ये अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के लिए हैं* *📚 दुर्रे मुख्तार व रद्दुल मुहतार जिल्द 1 सफ़ह 270,* *📚 सुनन अबी दाऊद जिल्द 2 सफ़ह 137 हदीस 1563* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क...

ज़कात वहाबी देवबंदी या गैर मुस्लिम को दे सकते हैं कि नहीं,*3️⃣4️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 34▪️* *📝 सवाल-;* *📇 ज़कात वहाबी देवबंदी या गैर मुस्लिम को दे सकते हैं कि नहीं,* *✍️ जवाब-:* *📇 वहाबी देवबंदी और तमाम बद मज़हब फिर्क़ों को ज़कात देना ह़राम है और इनको देने से ज़कात अदा नहीं होगी,आला ह़ज़रात इमाम अह़मद रज़ा खान, काफिर मुशरिक वहाबी राफ़ज़ी क़ादियानी वगैरह को ज़कात देने के मुतअल्लिक़ तह़रीर फरमाते हैं कि इनको ज़कात देना ह़राम है और इनको देने से ज़कात अदा न होगी* *📚 फ़तावा रज़वीया शरीफ़ जिल्द 4 सफ़ह 491* *📚 फ़तावा फक़ीहे मिल्लत जिल्द 1 सफ़ह 315* *📚 फ़तावा इस्माइलिया सफ़ह 393* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​*  *क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से* *👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।* *▪ امیــــــن ▪* 👑👑👑👑👑?...

वह कौन लोग हैं जिन को ज़कात नहीं दी जा सकती और उनको देने से अदा होगी या नहीं होगी*3️⃣3️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 33▪️* *📝 सवाल-;* *📇 वह कौन लोग हैं जिन को ज़कात नहीं दी जा सकती और उनको देने से अदा होगी या नहीं होगी* *✍️ जवाब-:* *📇 बनू हाशिम यानि सादाते कराम को ज़कात नहीं दे सकते, अगर कोई सय्यद साहब परेशान हों तो उनकी पाक पैसे से मदद करें, और अपनी अस्ल यानि जिनकी औलाद में से हैं जैसे माँ, बाप, दादा, दादी, नाना नानी, वगैरह इनको भी ज़कात नहीं दे सकते अगर दिया तो अदा नहीं होगी, इसी तरह बेटा, बेटी, पोता, पोती, नवासा, नवासी, वगैरह को भी ज़कात नहीं दे सकते अगर दिया तो अदा नहीं होगी, इसी तरह बीवी शौहर को या शौहर बीवी को ज़कात नहीं दे सकती, गनी के नाबालिग बच्चे को भी ज़कात नहीं दे सकते क्योंकि वह अपने बाप की वजह से गनी शुमार होते हैं* *📚 दुर्रे मुख्तार व रद्दुल मुहतार जिल्द 3 सफ़ह 344/349/350/* *📚 फ़तावा रज़वीया शरीफ़ जिल्द 10 सफ़ह 109* *📚 फैज़ाने ज़कात सफ़ह 61*  *📚 फ़तावा इस्माइलिया सफ़ह 396* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्...

क्या भीख मांगने वालों को ज़कात फित्रा देने से ज़कात फित्रा अदा हो जायेगी कि नहीं*3️⃣2️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 30▪️* *📝 सवाल-;* *📇 क्या भीख मांगने वालों को ज़कात फित्रा देने से ज़कात फित्रा अदा हो जायेगी कि नहीं* *✍️ जवाब-:* *📇 सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि भीख मांगने वाले 3 तरह के होते हैं* *1:- एक मालदार! जैसे बहुत से क़ौम के फ़क़ीर जिनका पेशा ही भीख मांगना होता है जोगी और साधू उन्हें भीख मांगना ह़राम और उन्हें देना भी ह़राम ऐसे लोगों को देने से ज़कात फित्रा अदा नहीं हो सकती* *2:- दूसरे वह जो हक़ीक़त में फ़क़ीर हैं यानि निसाब के मालिक नहीं मगर मज़बूत व तंदरुस्त हैं कमाने की ताक़त भी रखते हैं हाथ पैर सब सलामत है मोटे ताज़े होने के बावजूद कोई काम नहीं करना चाहते हैं मुफ़्त खाना खाने की आदत पड़ी है जिसके सबब भीख मांगते फिरते हैं ऐसे लोगों को भीख मांगना ह़राम है और जो उन्हें मांगने से मिले वह उनके लिए ख़बीस है ह़दीस शरीफ़ में है कि لا تحل الصدقةلغنى ولالذى مرةسوى،، यानि न किसी मालदार के लिए सदक़ा ह़लाल है और न किसी तवाना तंदरुस्त के लिए* *ऐसे लोगों को भीख देना मना है कि गुनाह...

क्या एतेक़ाफ़ में बैठने वाला शख्स रोज़ा खोलने के बाद सिगरेट पी सकता है*3️⃣1️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 31▪️* *📝 सवाल-;* *📇 क्या एतेक़ाफ़ में बैठने वाला शख्स रोज़ा खोलने के बाद सिगरेट पी सकता है* *✍️ जवाब-:* *📇 मोतकिफ़ एतेक़ाफ़ के दौरान ऐने मस्ज़िद जैसे मस्ज़िद का ह़ाल और सिहन में सिगरेट नहीं पी सकता, लेकिन फ़नाऐ मस्ज़िद में इस तरह़ सिगरेट पी सकता है कि सिगरेट का धुआँ ऐने मस्ज़िद तक न पहुंचे, और मस्ज़िद में दाख़िल होने से पहले मुंह को अच्छी तरह़ साफ़ कर ले, क्यूंकि अगर सिगरेट की बदबू ऐने मस्ज़िद तक पहुंची तो भी सिगरेट पीना जायज़ नहीं होगा, या मोतकिफ़ के मुंह में सिगरेट की बू बाक़ी हुई तो उसके लिए मस्जिद में दाख़िल होना जायज़ नहीं होगा* *📚 फ़तावा फैज़ुर रसूल जिल्द 1 सफ़ह 535* *📚 एतेक़ाफ़ के मसाइल सफ़ह 23* *👉 नोट:- अगर मोतकिफ़ सिगरेट पीने के लिए मस्ज़िद के अह़ाता से बाहर निकला तो उसका एतेक़ाफ़ टूट जायेगा* *फ़नाऐ मस्ज़िद उसे कहते हैं मस्ज़िद से मिली हुई वह जगह जो मस्ज़िद की ज़रुरियात के लिए वक़्फ़ की गई हो वह फ़नाऐ मस्ज़िद कहलाती है जैसे, वुज़ू खाना इस्तिन्जा खाना,गुस्ल...

3️⃣0️⃣क्या भीख मांगने वालों को ज़कात फित्रा देने से ज़कात फित्रा अदा हो जायेगी कि नहीं*

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 30▪️* *📝 सवाल-;* *📇 क्या भीख मांगने वालों को ज़कात फित्रा देने से ज़कात फित्रा अदा हो जायेगी कि नहीं* *✍️ जवाब-:* *📇 सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि भीख मांगने वाले 3 तरह के होते हैं* *1:- एक मालदार! जैसे बहुत से क़ौम के फ़क़ीर जिनका पेशा ही भीख मांगना होता है जोगी और साधू उन्हें भीख मांगना ह़राम और उन्हें देना भी ह़राम ऐसे लोगों को देने से ज़कात फित्रा अदा नहीं हो सकती* *2:- दूसरे वह जो हक़ीक़त में फ़क़ीर हैं यानि निसाब के मालिक नहीं मगर मज़बूत व तंदरुस्त हैं कमाने की ताक़त भी रखते हैं हाथ पैर सब सलामत है मोटे ताज़े होने के बावजूद कोई काम नहीं करना चाहते हैं मुफ़्त खाना खाने की आदत पड़ी है जिसके सबब भीख मांगते फिरते हैं ऐसे लोगों को भीख मांगना ह़राम है और जो उन्हें मांगने से मिले वह उनके लिए ख़बीस है ह़दीस शरीफ़ में है कि لا تحل الصدقةلغنى ولالذى مرةسوى،، यानि न किसी मालदार के लिए सदक़ा ह़लाल है और न किसी तवाना तंदरुस्त के लिए* *ऐसे लोगों को भीख देना मना है कि गुनाह...

किसी शख्स को मालूम नहीं कि साल के किस महीने में मालिके निसाब हुआ था, तो ज़कात किस महीने में निकाले*2️⃣9️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 29▪️* *📝 सवाल-;* *📇 किसी शख्स को मालूम नहीं कि साल के किस महीने में मालिके निसाब हुआ था, तो ज़कात किस महीने में निकाले* *✍️ जवाब-:* *📇 शरीअत ने जितने माल पर ज़कात को फ़र्ज़ क़रार दिया है, उसको निसाब कहते हैं। और जो उस माल का मालिक हो उसको मालिके निसाब या साहिबे निसाब कहते हैं। निसाब की मिक़दार (मात्रा) सोना (Gold) का निसाब: साढ़े सात तोला (87.48 ग्राम) चाँदी (Silver) का निसाब: साढ़े बावन तोला (612.36 ग्राम) करेंसी (नक़द पैसा), बॉन्ड्स, और मालए तिजारत (व्यापार का सामान) का निसाब 52.5 तोला चाँदी की कीमत के बराबर है। अगर किसी शख्स के पास अलग-अलग तरह का माल हो, तो सबको जोड़कर देखा जाएगा। अगर कुल कीमत साढ़े बावन तोला चाँदी की कीमत के बराबर हो जाए, तो वह भी साहिबे निसाब कहलाएगा* *और अगर किसी शख्स को मालूम नहीं कि साल के किस महीने में मालिके निसाब हुआ था, तो सूरते मसऊला में हुक्म यह है कि जिस माह (महीने) में साहिबे निसाब होने का गालिब गुमान हो उस माह में ज़कात अदा करें* *📚 ...

ज़ैद ने बकर को ज़कात दी कि फुलां शख्स को दे दो, अगर ऐसी सूरत में यह रकम (पैसा) बकर से गुम हो जाए या कोई छीन ले तो ऐसी सूरत में ज़ैद की ज़कात अदा होगी या नहीं*2️⃣8️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 28▪️* *📝 सवाल-;* *📇 ज़ैद ने बकर को ज़कात दी कि फुलां शख्स को दे दो, अगर ऐसी सूरत में यह रकम (पैसा) बकर से गुम हो जाए या कोई छीन ले तो ऐसी सूरत में ज़ैद की ज़कात अदा होगी या नहीं* *✍️ जवाब-:* *📇 ज़कात की अदायगी फ़क़ीर को मालिक कर देने से होती है, ज़कात की रक़म अलग कर देने या वकील को सुपुर्द कर देने से अदा नहीं होती, लिहाज़ा अगर फ़क़ीर को मालिक कर देने से पहले रक़म गुम हो गई या गुम कर दी या छीन ली गई तो ज़कात अदा ना हुई दुबारा ज़कात अदा करना होगी हां अलबत्ता अगर यह गुम होना वकील की तक़सीर (लापरवाही) या तअद्दी (ज़बरदस्ती) से हुआ तो वकील असल मालिक को तावान देगा अगर तअद्दी ना थी जब भी उस पर मालिक को बताना लाज़िम है, कि उसकी ज़कात अदा ना हुई ताकि वह दुबारा अपनी ज़कात अदा करे* *दुर्रे मुख्तार: ज़कात को अलिहदा (अलग) कर देने से बरीउज ज़िम्मा (ज़िम्मेदारी से कंपलेट होना) नहीं होगा बल्कि फ़क़ीर को अदा करने से बराअत (छुटकारा) होगी* *रद्दुल मोहतार: अगर ज़कात का माल गुम हो गया तो इ...

ज़कात का माल किन चीजों में खर्च करना जाइज़ नहीं है*2️⃣7️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 27▪️* *📝 सवाल-;* *📇 ज़कात का माल किन चीजों में खर्च करना जाइज़ नहीं है* *✍️ जवाब-:* *📇 ज़कात का माल मस्जिद की तामीर या मस्जिद के किसी दूसरी ज़रूरीयात में और ऐसे ही मय्यत के कफ़न दफन में या मय्यत के कर्ज़ अदा करने में ज़कात का माल ख़र्च करना जाइज़ नहीं*  *📚 इस्लामी तालीम, सफा नं. 69,70* *👉 नोट:- यह है कि जिन चीजों में ज़कात की रकम का कोई हकदार मालिक न बनाया जा सके उन चीज़ों में ज़कात की रकम का ख़र्च करना जाइज़ नहीं* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​*  *क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से* *👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।* *▪ امیــــــن ▪* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* https://chat.whatsapp.com/I3NIYUqg...

किराए पर जो मकान दिया गया है उस मकान की क़ीमत और किराए पर ज़कात का क्या हुक्म होगा*2️⃣6️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 26▪️* *📝 सवाल-;* *📇 किराए पर जो मकान दिया गया है उस मकान की क़ीमत और किराए पर ज़कात का क्या हुक्म होगा* *✍️ जवाब-:* *📇 जो मकान किराए पर दिया हुवा है उसकी क़ीमत पर ज़कात फ़र्ज़ नहीं अलबत्ता निसाब का साल पूरे होने पर अगर किराए वाली रक़म हाजते असलिय्या के इलावा मौजूद है तो वह दीगर अमवाले ज़कात के साथ हिसाब में शुमार होगी, अगर शराइत पाई गएं तो उस पर ज़कात फ़र्ज़ होगी फ़तावा रज़विया में है किराए के मकानात पर ज़कात नहीं अगरचे पचास करोड़ के हों किराया से जो साल तमाम पर पस उस पर ज़कात आएगी अगर खुद या और माल से मिल कर क़दरे निसाब हो।* *📚 सौ शरई मसाइल का मजमुआ सफा 42* *📚 फतावा रज़विया जिल्द 10 सफा 161* *👉 नोट :- खुलासा यह आसानी से समझे कि जो मकान की क़ीमत है मसलन पचास लाख तो उस पर ज़कात नहीं होगा क्योंकि वो मकान है जोकि माले ज़कात में शुमार नहीं होता, मगर जो किराया आता है तो चूंकि वो पैसे की शक्ल में होता है तो अगर वो हाजते असलिय्या यानी ज़रूरत से ज़ियादा है तो इस पैसे पर ज...

रमज़ान में वित्र की नमाज़ जमाअत से पढ़ी जाती है, तो ऐसे में मुक़्तदी को दुआए कुनूत इमाम के पीछे पढ़ने का क्या हुक्म है*2️⃣5️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 25▪️* *📝 सवाल-;* *📇 रमज़ान में वित्र की नमाज़ जमाअत से पढ़ी जाती है, तो ऐसे में मुक़्तदी को दुआए कुनूत इमाम के पीछे पढ़ने का क्या हुक्म है* *✍️ जवाब-:* *📇 मुक़्तदी को दुआए कुनूत पढ़ना वाजिब है, चाहे वो जमाअत से पढ़े या तन्हा पढ़े, जैसा कि हुज़ूर सदरुश शरीअह अलैहिर्रहमा फरमाते हैं कि वित्र में दुआए कुनूत का पढ़ना वाजिब है और आहिस्ता पढ़े अब वह चाहे इमाम हो या मुंफरिद (अकेले नमाज़ पढ़ने वाला) हो या मुक़्तदी हो अदा हो या क़ज़ा रमज़ान में हो या और दिनों में और आगे तहरीर फरमाते हैं कि कुनूत वित्र में मुक़्तदी इमाम की मुताबअत करे (यानी इमाम के साथ कुनूत पढ़े) अगर मुक़्तदी कुनूत से फारिग ना हुवा था कि इमाम रुकूअ में चला गया तो मुक़्तदी इमाम का साथ दे (यानी मुक़्तदी भी इमाम के साथ रुकूअ में चला जाए) और अगर इमाम ने कुनूत ना पढ़ी और रुकूअ में चला गया और मुक़्तदी ने अभी कुछ ना पढ़ा, तो मुक़्तदी को अगर रुकूअ फौत होने (छूट जाने) का अंदेशा हो जब तो रुकूअ करे वरना कुनूत पढ़ कर रुकूअ...

अपनी बेवा लड़की को ज़कात का माल देना अज़ रूए शरअ कैसा है*2️⃣4️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 24▪️* *📝 सवाल-;* *📇 अपनी बेवा लड़की को ज़कात का माल देना अज़ रूए शरअ कैसा है* *✍️ जवाब-:* *📇 बाप अपनी बेटी या बेटी अपने बाप को ज़कात नहीं दे सकते इसी तरह मां अपनी बेटी या बेटी अपनी मां को ज़कात नहीं दे सकती की यह जायज़ नहीं वरना ज़कात अदा नहीं होगी, अगरचे लड़की बेवा हो हां अगर मदद करना ही है तो ऐसे ही अतिया से मदद करें* *हदीस शरीफ में है बहक़ी ने हज़रत ए मौला अली रज़ि अल्लाहू तआला अन्हु से रिवायत की की फ़रमाया सदक़ ए मफ़रूज़ा में औलाद और वालिद का हक़ नहीं है* *📚 السنن الکبری، کتاب قسم الصدقات باب المراة تصریف من زکاتھا فی زوجھا، الحدیث 13229، جلد ہفتم، صفحہ نمبر، 45* *चुनांचे बदाउस सनाअ मे है और उन्हीं शराईत में से एक यह भी है कि इम्लाक के मनाफेअ ज़कात देने वाले और लेने वाले के दरमियान मुत्तसिल ना हों क्योंकि ऐसा होना ज़कात की अदायगी से माने है कि इसमें (من کل الوجوہ) तमलिक (تملیک) फक़ीर नहीं पाई जा रही है बल्कि यह एक एतबार से अपने ऊपर ही ज़कात का पैसा खर्च करना है इ...

दूध पिलाने वाली और हामिला औरत को रमज़ान के रोज़े रखने का क्या हुक्म है*2️⃣3️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 23▪️* *📝 सवाल-;* *📇 दूध पिलाने वाली और हामिला औरत को रमज़ान के रोज़े रखने का क्या हुक्म है* *✍️ जवाब-:* *📇 अगर हम्ल वाली (जिस के रहम में बच्चा हो) या दूध पिलाने वाली औरत को अपने या अपने बच्चे के ज़रर का अंदेशा गलबा ज़न्न के साथ हो तो उसे रोज़ा छोड़ना जाइज़ है मगर बाद में उसकी क़ज़ा रखनी पड़ेगी और उनके ऊपर कफ़्फ़ारा नहीं फ़तावा रज़विया में है हामिला को भी मिस्ले मर्ज़िआ (यानी दूध पिलाने वाली) रोज़ा न रखने की इजाज़त उसी सूरत में है कि अपने या बच्चे के ज़रर (नुकसान) का गलबा ज़न्न के साथ हो न कि मुतलक़न (असलन)* *बहारे शरीअत में ज़न्ने गालिब की तीन सुरतें हैं*, *(1) उसकी ज़ाहिर निशानी पाई जाए* *(2) उस शख्स का ज़ाती तजुर्बा हो* *(3) किसी मुसलमान तबीब (डॉक्टर) जो फासिक़ न हो उसकी ख़बर दी हो* *📚 दुर्रे मुख़्तार जिल्द 3 सफ़ह 403* *📚 फ़तावा आलमगिरी जिल्द 1 सफ़ह 228* *📚 फ़तावा रज़विया जिफ 8 सफ़ह 429* *📚 बहारे शरीअत हिस्सा पंजुम सफ़ह 131* *👉 नोट:- खुलासा यह कि जब औरत को यक़ी...

गैर रोज़ादार रोजे़दारों के साथ इफ़्तार खा सकता है या नहीं*2️⃣2️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 22▪️* *📝 सवाल-;* *📇 गैर रोज़ादार रोजे़दारों के साथ इफ़्तार खा सकता है या नहीं* *✍️ जवाब-:* *📇 गैर रोज़ादार रोजे़दारों के साथ इफ़्तार नहीं कर सकता यह कहते हुए कि हम रोजे़दार हैं ऐसा करना हराम है बाज़ लोग इफ़्तारी खाने के चक्कर में अपने आप को रोजे़दार ठहराते हैं यह सख़्त हराम है और इसका जिम्मा रोज़ेदारों पर नहीं* *अगर रोज़ादार ना हो और रोज़ादार लोग यह जानते हैं जो खुद कहता है कि हम रोज़ा नहीं रखते हैं ऐसी सूरत में रोज़ादार हज़रात अगर गैर रोज़ादार शख्स को इफ़्तारी में बुलाते हैं तो बुलाने वाला गुनाहगार अक्सर व बेशतर जगह मस्जिद के सेहन में बेरोज़ादार बच्चे लोग बहुत होते हैं और वह सिर्फ इफ़्तारी के लिए आते हैं तो बेहतर है उन बच्चों को वक़्त से पहले या वक़्त के बाद अलग निकाल कर दे दें ताकि उनका खाना इफ़्तार में शुमार ना हो हुजूर आला हज़रत अज़िमुल बरकत तहरीर फ़रमाते हैं और इफ़्तारी में गैर रोज़ादार अगर रोजे़दार बनकर शरीक़ होते हैं मुतवल्लियों पर इल्ज़ाम नहीं, यहां उन गैर रो...

तंबाकू मुंह में रखकर सो जाए और सेहरी के बाद बेदार होने पर रोज़े का क्या हुक्म है*2️⃣1️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 21▪️* *📝 सवाल-;* *📇 तंबाकू मुंह में रखकर सो जाए और सेहरी के बाद बेदार होने पर रोज़े का क्या हुक्म है* *✍️ जवाब-:* *📇 सुरत ए मसउला में ज़ैद रात में तंबाकू मुंह में रखकर सुबह तक सोता रहा अगर सोने में तंबाकू के ज़रात मुंह के अंदर हलक़ के नीचे जाना गुमान हो तो ज़ैद का रोज़ा नहीं होगा हां अगर ग़ालिब गुमान हो कि ज़रात हलक़ के नीचे नहीं गया है तो रोज़ा हो जाएगा जैसा कि सय्यदी सरकार ए आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी अलैहिर्रहमा तहरीर फरमाते हैं कि अगर रात में पान खा लिया और सुबह तक उगाल मुंह में था जिसका जुर्म ख्वाह अर्क़ लुआब के साथ-साथ हलक़ में जाना मज़नून (गालिब गुमान) है तो रोज़ा ना होगा* *📚 फ़तावा ए रिज़वीया क़दीम जिल्द चहारूम सफ़ह 586* *📚 माखूज़ फतावा ए अकरमी सफ़ह 113, 114* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे...

जानबूझकर किसी ने एक रोज़ा तोड़ दिया अब उसका कफ़्फ़ारा क्या होगा*2️⃣0️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 20▪️* *📝 सवाल-;* *📇 जानबूझकर किसी ने एक रोज़ा तोड़ दिया अब उसका कफ़्फ़ारा क्या होगा* *✍️ जवाब-:* *📇 जानबूझकर एक रोजा तोड़ने का कफ़्फ़ारा यह है कि एक गुलाम आजाद करे ( मौजुदा दौर मे यह किसी भी मुल्क मे मुमकीन नही ) दुसरी सुरत यह है के लगातार साठ (60) रोज़े रखे और अगर रोज़ा रखने की सूरत में अगर बीच में एक दिन का भी रोज़ा छूट गया तो अब फिर से साठ (60) रोज़े रखने होगें पहले रखे हुए रोज़ों को गिना नही जाएगा मसलन (59) रख चुका था साठवॉं नही रख सका तो फिर से रोज़े रखे पहले के उन्सठ (59) बेकार हो गए लेकिन अगर औरत को रोज़े रखने के दौरान हैज़ (माहवारी) आ गई तो हालते हैज़ मे रोज़े रखना छोड़ दे फिर बाद में पाक़ होने के बाद बचे हुए रोज़े रखे यानी पहले के रोज़े और हैज़ के बाद वाले रोज़े पुरे कर ले हैज से पहले और हैज के बाद के दोनों को मिला कर साठ (60) रोजे हो जाने से कफ़्फ़ारा अदा हो जाएेगा अगर यह भी न हो सके तो फिर 60 मिस्कीनो (गरीब मोहताज़ों) को पेट भर कर दोनो वक्त़ो का खाना खिलाए अगर ...

रमज़ान का एक रोज़ा जो बिला किसी उज़्रे शरई जान बुझ कर ज़ाए कर देना ( छोड़ना ) कैसा है1️⃣9️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 19▪️* *📝 सवाल-;* *📇 रमज़ान का एक रोज़ा जो बिला किसी उज़्रे शरई जान बुझ कर ज़ाए कर देना ( छोड़ना ) कैसा है* *✍️ जवाब-:* *📇 रमज़ान का एक रोज़ा जो बिला किसी उज़्रे शरई जान बुझ कर ज़ाए कर दे तो अब उम्र भर भी अगर रोज़े रखता रहे तब भी इस छोड़े हुए एक रोज़े की फ़ज़ीलत को नहीं पा सकता हज़रते अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है जिसने रमज़ान के एक दिन का रोज़ा बगैर रुखसते मर्ज़ न रखा तो ज़माने भर का रोज़ा भी इस की क़ज़ा नहीं हो सकता अगर्चे बाद में रख भी ले* *📚 सहीह बुखारी हदीस 1934*  *👉 नोट; यानी वो फ़ज़ीलत जो रमज़ान में रोज़ा रखने की थी अब किसी तरह नहीं पा सकता लिहाज़ा हमें हरगिज़ हरगिज़ गफलत का शिकार हो कर रोज़ ए रमज़ान जेसी अज़ीमुश्शान नेमत नहीं छोड़नी चाहिए ।* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​*...

*📇 क्या रोज़ा में इंजक्शन लगवाने से रोज़ा टूट जाता है*1️⃣8️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 18▪️* *📝 सवाल-;* *📇 क्या रोज़ा में इंजक्शन लगवाने से रोज़ा टूट जाता है* *✍️ जवाब-:* *📇 सही मस्अला यह है कि इंजक्शन ख़्वाह गोश्त में लगवाया जाए या रग़ में इस से रोज़ा नहीं टूटता, अलबत्ता उलमा ए कराम ने रोज़े में इंजक्शन लगवाने को मकरुह फ़रमाया है जब तक ख़ास ज़रुरत न हो न लगवायें, ख़ास ज़रुरत पर रोज़ा में भी इंजक्शन लगवा सकते हैं इस से रोज़ा नहीं टूटेगा,* *📚 ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह सफ़ह 71* *📚 फ़तावा फ़ैज़ुर रसूल जिल्द 1 सफ़ह 517* *📚 फ़तावा मरकज़ी दारुल इफ़्ता सफ़ह 359* *📚 मक़ालात शारेह़ बुख़ारी जिल्द 1 सफ़ह 408/398* *📚 दुर्रे मुख़्तार मा रद्दुल मुह़तार जिल्द 3 सफ़ह 398* *📚 मजलिसे शरई के फैसले सफ़ह 284* *📚 फ़तावा गौसिया जिल्द 1 सफ़ह 209* *📚 फ़तावा अलीमिया जिल्द 1 सफ़ह 418- रोज़ा का ब्यान* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं प...

रमज़ानुल मुबारक के रोज़ों की तादाद के बारे में ये कहना कैसा है के अब तो रोज़े रख रख कर मैं बोर हो गया*1️⃣7️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 17▪️* *📝 सवाल-;* *📇 रमज़ानुल मुबारक के रोज़ों की तादाद के बारे में ये कहना कैसा है के अब तो रोज़े रख रख कर मैं बोर हो गया* *✍️ जवाब-:* *📇 रमज़ानुल मुबारक के रोज़ो की तादाद के बारे में ये कहना की अब रोज़े रख कर मैं बोर हो गया हूं इस जुमले में कुफ्रिया पहलु मौजूद है चुनांचे फ़तवा ए आलमगीरी में है जो रोज़ा रमजानुल मुबारक के बारे में कहे कितने ज़्यादा हैं मेरा तो दिल उक्त गया है ये क़ौल कुफ़्र है* *मौजूदा दौर में बाज़ दुनियावी तालीम से आरास्ता लोग सोशल मीडिया पर शराई मसाईल का मज़ाक़ उडते हैं वह जहां हर चीज़ को अक़ल के पैमाने में तोलते है वाहि शराई मसाईल में अक़ल का दख्ल नही याद रहे शराई मसाईल में अक़ल का दखल नही दीनी मसाईल में कुरआन व सुन्नत बुनियाद है अक़ल बुनियाद नहीं लिहाज़ा शराई मसाईल का मज़ाक़ उडाना चाहे वह मीडिया पर हो या सोशल मीडिया पर दोस्तों की महफ़िल में हो या सियासी व समाजी जल्सो में सख्त मना है शराई मसाईल का मज़ाक़ उडाना बाज़ सुरतो में सख्त गुनाह और बाज़ सुरतो में कुफ़्र की तरफ भी ले ज...

किसी ने रोज़े की हालत में रोज़ा याद होने के बावुजूद इत्र कि शीशी को मुंह के पास अपना नाक ले जाकर सूंघा जिस से खुशबू पूरे नाक में चली गई तो क्या इससे रोज़ा टूट जाएगा।*1️⃣6️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *~_____________________________________~* *🧮 पोस्ट 16▪️* *📝 सवाल-;* *📇 किसी ने रोज़े की हालत में रोज़ा याद होने के बावुजूद इत्र कि शीशी को मुंह के पास अपना नाक ले जाकर सूंघा जिस से खुशबू पूरे नाक में चली गई तो क्या इससे रोज़ा टूट जाएगा।* *✍️ जवाब-:* *📇 रोज़ा नहीं टूटेगा लोबान और अगरबत्ती का वही हुक्म है जो धूँवे और गुबार का है यानी अगर रोज़ा याद होने की सूरत में धुंआ अंदर ले जाने की निय्यत से नाक क़रीब कर के सूंघा तो रोज़ा टूट जाएगा और अगर रोजदार होना याद न हो यानी भूले से सूंघा तो रोज़ा ना जायेगा* *रूम स्पेरे की कमरे में फैली हुई खुशबू या इत्र (अत्र) सूंघने से मुतलक़न रोज़ा नहीं टूटेगा क्योंकि इत्र सूंघने से कोई ऐसी मादी चीज़ हल्क़ में नहीं जाती जो (रोज़ा) टूटने का बाइस (सबब) बन सके ख्वाह इत्र की शीशी के मुंह पर नाक रख कर सूंघा जाए या कपड़ो और हाथो पर लगाकर सूंघा जाए गुलाब या मुश्क वगैरा सूंघना, दाढ़ी मूंछ में तेल लगाना और सुरमा लगाना मकरूह नहीं और रोज़े की हालत में हर क़िस्म का इत्र सूंघ भी सकते हैं और कपड़ो पर लगा ...