मोअ़्तकिफ़ कब बाहर निकल सकता है
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*🥀 मोअ़्तकिफ़ कब बाहर निकल सकता है 🥀*
🔛 मोअ़्तकिफ़ का बिग़ैर मजबूरी के मस्जिद से बाहर निकलना कैसा? एअ़्तिकाफ़े वाजिब में मोअ़्तकिफ़ को मस्जिद से बिग़ैर उ़ज़्र निकलना ह़राम है,अगर निकला तो एअ़्तिकाफ़ जाता रहा अगर्चे भूल कर निकला हो यूँही एअ़्तिकाफ़े सुन्नत भी बिग़ैर उ़ज़्र निकलने से जाता रहता है यूँही औ़रत ने मस्जिदे बैत में एअ़्तिकाफ़े वाजिब या मस्नून किया तो बिग़ैर उ़ज्र वहाँ से नहीं निकल सकती, अगर वहाँ से निकली अगर्चे घर ही में रही एअ़्तिकाफ़ जाता रहा
*📚 बहारे शरीअ़त, जिल्द 1, ह़िस़्स़ह 5, पेज 1023, मस्अलह 17*
मोअ़्तकिफ़ मस्जिद से कब निकल सकता है? मोअ़्तकिफ़ को मस्जिद से निकलने के दो उ़ज़्र हैं:
1️⃣ एक ह़ाजते त़बई़ कि मस्जिद में पूरी न हो सके जैसे पाख़ाना, पेशाब, इस्तिन्जा, वुज़ू और ग़ुस्ल की ज़रुरत हो तो ग़ुस्ल, मगर ग़ुस्ल व वुज़ू में येह शर्त़ है कि मस्जिद में न हो सकें यअ़्नी कोई ऐसी चीज़ न हो जिस में वुज़ू व ग़ुस्ल का पानी ले सके इस त़रह़ कि मस्जिद में पानी की कोई बूंद न गिरे कि वुज़ू व ग़ुस्ल का पानी मस्जिद में गिराना नाजाइज़ है और लगन वग़ैरह मौजूद हो कि उस में वुज़ू इस त़रह़ कर सकता है कि कोई छींट मस्जिद में न गिरे तो वुज़ू के लिए मस्जिद से निकलना जाइज़ नहीं, निकलेगा तो एअ़्तिकाफ़ जाता रहेगा यूँही अगर मस्जिद में वुज़ू व ग़ुस्ल के लिए जगह बनी हो या ह़ौज़ हो तो बाहर जाने की अब इजाज़त नहीं
2️⃣ दोम ह़ाजते शरई़ मस्लन ई़द या जुमुअ़ह के लिए जाना या अज़ान कहने के लिए मनारह (मीनार) पर जाना, जब्कि मनारह पर जाने के लिए बाहर ही से रास्तह हो और अगर मनारह का रास्तह अन्दर से हो तो ग़ैर मुअज़्ज़िन भी मनारह पर जा सकता है मुअज़्ज़िन की तख़्स़ीस़ नहीं
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, मस्अलह 18*
किन वजहों से निकलने पर एअ़्तिकाफ़ फासिद होगा? अगर डूबने या जलने वाले के बचाने के लिए मस्जिद से बाहर गया या गवाही देने के लिए गया या जिहाद में सब लोगों का बुलावा हुवा और येह भी निकला या मरीज़ की इ़यादत या नमाज़े जनाज़ह के लिए गया, अगर्चे कोई दूसरा पढ़ने वाला न हो तो इन सब स़ूरतों में एअ़्तिकाफ़ फ़ासिद हो गया
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, मस्अलह 24*
ह़ाजते त़बई़ के लिए निकला लेकिन क़र्ज़ ख़्वाह ने रोक लिया तो एअ़्तिकाफ़ का ह़ुक्म: पाख़ाना पेशाब के लिए गया था, क़र्ज़ ख़्वाह ने रोक लिया एअ़्तिकाफ़ फ़ासिद हो गया
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, मस्अलह 27*
मोअ़्तकिफ़ खाना पानी कहाँ खाए पिए?
मोअ़्तकिफ़ मस्जिद ही में खाए, पिए, सोए इन उमूर के लिए मस्जिद से बाहर होगा तो एअ़्तिकाफ़ जाता रहेगा मगर खाने पीने में येह एह़तियात़ लाज़िम है कि मस्जिद आलूदह न हो
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, मस्अलह 33*
मोअ़्तकिफ़ का मस्जिद में ख़रीदना बेचना:
मोअ़्तकिफ़ को अपनी या बाल बच्चों की ज़रूरत से मस्जिद में कोई चीज़ ख़रीदना या बेचना जाइज़ है, ब-शर्त़े-कि वोह चीज़ मस्जिद में न हो या हो तो थोड़ी हो कि जगह न घेरे और अगर ख़रीद व फ़रोख़्त ब-क़स़्दे तिजारत हो तो नाजाइज़ अगर्चे वोह चीज़ मस्जिद में न हो
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, मस्अलह 35*
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