एअ़्तिकाफ़ के फ़ज़ाइल अह़ादीस
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*🥀 एअ़्तिकाफ़ के फ़ज़ाइल अह़ादीस 🥀*
🔛 *एअ़्तिकाफ़ पुरानी इ़बादत है:*
पिछली उम्मतों में भी एअ़्तिकाफ़ की इ़बादत मौजूद थी चुनांचे क़ुरआने मुक़द्दस में अल्लाह तबार-क व तआ़ला का फ़रमाने आ़ली शान है: وَ عَهِدۡنَاۤ اِلٰۤى اِبۡرٰهٖمَ وَ اِسۡمٰعِیۡلَ اَنۡ طَهِّرَا بَیۡتِیَ لِلطَّآئِفِیۡنَ وَالۡعٰكِفِیْنَ وَ الرُّكَّعِ السُّجُوۡدِ तर्जुमए कन्ज़ुल ईमान: और हम ने इब्राहीम व इस्माई़ल को ताकीद फ़रमाई कि मेरा घर त़वाफ़ करने वालों और एअ़्तिकाफ़ करने वालों और रुकूअ़् व सुजूद करने वालों के लिए ख़ूब पाक स़ाफ़ रखो
*📚 अल् क़ुरआन, पारह¹, सूरतुल बक़रह, आयत 125*
*रमज़ान के आख़िरी 10 दिन का एअ़्तिकाफ़:*
स़ह़ीह़ैन में उम्मुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते आ़इशह स़िद्दीक़ह رضی الله عنہا से मरवी, कि रसूलुल्लाह ﷺ रमज़ान के आख़िर अ़शरह (यअ़्नी माहे रमज़ान के आख़िरी दस दिन) का एअ़्तिकाफ़ फ़रमाया करते
*📚 बहारे शरीअ़त, जिल्द 1, ह़िस़्स़ह 5, पेज 1021, ह़दीस 1*
*मुअ़्तकिफ़ गुनाहों से रुका रहता है:*
इब्ने माजह इब्ने अ़ब्बास رضی الله عنہما से रावी, कि रसूलुल्लाह ﷺ ने मुअ़्तकिफ़ के बारे में फ़रमाया वोह गुनाहों से बाज़ रहता है और नेकियों से उसे उस क़दर सवाब मिलता है जैसे उसने तमाम नेकियां कीं
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, ह़दीस 2*
*दो ह़ज और दो उ़मरे का सवाब:*
बैहक़ी इमामे ह़ुसैन رضی الله عنہ से रावी, कि ह़ुज़ूरे अक़दस ﷺ ने फ़रमाया जिसने रमज़ान में दस दिनों का एअ़्तिकाफ़ कर लिया तो ऐसा है जैसे दो ह़ज और दो उ़मरे किए
*📚 बहारे शरीअ़त, एअ़्तिकाफ़ का बयान, ह़दीस 4*
*रमज़ान के आख़िरी 10 दिन का एअ़्तिकाफ़:*
उम्मुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदतुना आ़इशह स़िद्दीक़ह رضی الله عنہا रिवायत फ़रमाती हैं कि रसूले अकरम ﷺ रमज़ानुल मुबारक के आख़िरी अ़शरह (यअ़्नी आख़िरी दस दिन) का एअ़्तिकाफ़ फ़रमाया करते यहाँ तक कि अल्लाह ﷻ ने आप ﷺ को वफ़ाते (ज़ाहिरी) अ़त़ा फ़रमाई फिर आप ﷺ के बअ़्द आप ﷺ की अज़वाजे मुत़ह्हरात एअ़्तिकाफ़ करती रहीं
*📚 फ़ैज़ाने रमज़ान, बाब फ़ैज़ाने एअ़्तिकाफ़, पेज 228*
*📚 बुख़ारी शरीफ़, जिल्द 1, पेज 664, ह़दीस 2026*
*एक दिन के एअ़्तिकाफ़ की फ़ज़ीलत:*
फ़रमाने मुस़्त़फ़ा ﷺ जो शख़्स़ अल्लाह ﷻ की रज़ा व ख़ुशनूदी के लिए एक दिन का एअ़्तिकाफ़ करेगा अल्लाह ﷻ उसके और जहन्नम के दर्मियान तीन ख़न्दक़ें ह़ाइल कर देगा हर ख़न्दक़ की मसाफ़त (यअ़्नी दूरी) मशरिक़ व मग़रिब के फ़ास़िले से भी ज़्यादह होगी
*📚 फ़ैज़ाने रमज़ान, बाब फ़ैज़ाने एअ़्तिकाफ़, पेज 228*
*📚 मुअ़्जमे औसत़, जिल्द 5, पेज 279, ह़दीस 7326*
*साबिक़ह गुनाहों की बख़्शिश:*
उम्मुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदतुना आ़इशह स़िद्दीक़ह رضی الله عنہا से रिवायत है कि रसूले अकरम ﷺ का फ़रमाने ख़ुश्बू-दार है तर्जुमह जिस शख़्स़ ने ईमान के साथ और सवाब ह़ास़िल करने की निय्यत से एअ़्तिकाफ़ किया उसके पिछले गुनाह बख़्श दिए जाएंगे
*📚 फ़ैज़ाने रमज़ान, बाब फ़ैज़ाने एअ़्तिकाफ़, पेज 230*
*📚 अल् जामिउ़स़् स़ग़ीर, पेज 516, ह़दीस 8480*
*सारे महीने का एअ़्तिकाफ़:*
ह़ज़रते सय्यिदुना अबू सई़द ख़ुदरी رضی الله عنہ से रिवायत है एक मर्तबह सुल्त़ाने दो जहान, शहन्शाहे कौनो मकान, रह़मते आ़लमियान ﷺ ने यक्कुम (एक) रमज़ान से बीस रमज़ान तक एअ़्तिकाफ़ करने के बअ़्द इरशाद फ़रमाया मैं ने शबे क़द्र की तलाश के लिए रमज़ान के पहले अ़शरे का एअ़्तिकाफ़ किया फिर दर्मियानी अ़शरे का एअ़्तिकाफ़ किया फिर मुझे बताया गया कि शबे क़द्र आख़िरी अ़शरे में है लिहाज़ा तुम में से जो शख़्स़ मेरे साथ एअ़्तिकाफ़ करना चाहे वोह करले
*📚 फ़ैज़ाने रमज़ान, बाब फ़ैज़ाने एअ़्तिकाफ़, पेज 231*
*📚 मुस्लिम शरीफ़, पेज 594, ह़दीस 1167*
*रोज़ानह ह़ज का सवाब:*
ह़ज़रते सय्यिदुना ह़सन बस़री رضی الله عنہ से मन्क़ूल है मुअ़्तकिफ़ को हर रोज़ एक ह़ज का सवाब मिलता है
*📚 फ़ैज़ाने रमज़ान, बाब फ़ैज़ाने एअ़्तिकाफ़, पेज 233*
*📚 शुअ़बुल ईमान, जिल्द 3, पेज 425, ह़दीस 3968*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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