उजरत देकर तरावीह़ पढ़वाना कैसा
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*🥀 उजरत देकर तरावीह़ पढ़वाना कैसा 🥀*
🔛 ख़लीफ़ए अअ़्ला ह़ज़रत, ह़ुज़ूर स़दरुश् शरीअ़ह मुफ़्ती अमजद अ़ली अअ़्ज़मी رحمة الله تعالٰى علیه फ़रमाते हैं आज कल अकसर रिवाज हो गया है कि ह़ाफ़िज़ को उजरत (यअ़्नी मज़दूरी) देकर तरावीह़ पढ़वाते हैं येह नाजाइज़ है देने वाला और लेने वाला दोनों गुनहगार हैं,
उजरत (मज़दूरी) स़िर्फ़ यही नहीं कि पेश्तर (पहले) मुक़र्रर करलें कि येह लेंगे येह देंगे, बल्कि अगर मअ़्लूम है कि यहाँ कुछ मिलता है, अगरचे उस से त़य न हुवा हो येह भी नाजाइज़ है, कि اَلۡمَعۡرُوۡفُ کَالۡمَشۡرُوۡطِ (येह फ़िक़्ह का एक क़ाइ़दह है कि मअ़्रूफ़ मशरूत़ की त़रह़ है यअ़्नी जो चीज़ मशहूर हो वोह त़य शुदह मुआ़मले का ह़ुक्म रखती है
*📚 बहारे शरीअ़त, जिल्द,1 पेज,55 ह़िस़्स़ह,4 की इस़्त़िलाह़ात*
*📚 बहारे शरीअ़त, जिल्द,1 ह़िस़्स़ह,4 पेज,692 मसअलह,20*
बहारे शरीअ़त के इस मसअले से मुतअ़ल्लिक़ फ़क़ीहे मिल्लत दारुल इफ़्ता (शहज़ादए फ़क़ीहे मिल्लत, मुफ़्ती अज़हार अह़मद अमजदी अज़हरी स़ाह़ब क़िब्लह की मअ़्रिफ़त में टेलीग्राम पर चलने वाला एक मोअ़्तबर ग्रूप) में एक सुवाल और उस का जवाब:
*सुवाल:*
क्या येह ह़ुक्म मन्सूख़ हो गया है
अगर येह ह़ुक्म मन्सूख़ नहीं हुवा है तो ऐसे ह़ाफ़िज़े क़ुरआन, कमेटी के लोग, इमाम स़ाह़ब और जो जो लोग ह़ाफ़िज़ स़ाह़ब के लिए चन्दह करके उजरत देने में शरीक रहते हैं, उन सब पर शरीअ़ते मुत़ह्हरह का क्या ह़ुक्म है नीज़ लेने वाले और देने वाले या दिलाने वालों के पीछे नमाज़ पढ़ना कैसा है?
*जवाब:* येह ह़ुक्म मन्सूख़ नहीं है।
सब नाजाइज़ के मुर्तकिब तौबह करें बअ़्दे तौबह इमामत जाइज़ والله تعالٰی اعلم
*👉ह़ाफ़िज़ स़ाह़ब को उजरत देकर तरावीह़ पढ़वाना नाजाइज़ है लिहाज़ा नाजाइज़ काम के लिए चन्दह करना भी नाजाइज़ है।*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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