ह़राम खाने,(गोश्त) से रोज़ा इफ़्त़ार करना
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*🥀 ह़राम खाने,(गोश्त) से रोज़ा इफ़्त़ार करना 🥀*
🔛 आज हमारे मुआशरे में हराम चीज़ो (गोश्त) का इतना ज़्यादा शौक़ बढ़ता जा रहा है मुसलमान मर्द, हो या औरत, सभी को ज़ुबान का ज़ायक़ा (टेस्ट) मिलना चाहिए अब उसमे कितना नुक्सान (गुनाह) है इस्से कुछ फ़र्क नही पढ़ता बस मज़ा मिलना चाहिए अब तो हद़ ही पार हो गई आम दिनो में तो हराम (गोश्त) खाते ही थे अब तो रोज़ा इफ़्त़ार के लिए भी कोई डर (खौफ) नही बचा है।
आज अगर कोई ह़राम (गोश्त) से मना करदें अल्लाहु अकबर उसका सबसे बढ़ा दुश्मन वही है मगर हक़ीक़त यही है जो आशिक़ ए रसूलﷺ होगा जिसके दिल में अल्लाह रब्बुल इ़ज़्ज़त का डर (ख़ौफ) होगा वोह हमेशा यही कहेगा भूखे तो मर जाएगें लेकिन दुनिया में चंद लम्हे के लिए कभी भी ह़राम नही खाएगें।
हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया हर वोह गोश्त (जिस्म) जो ह़राम से परवान चढ़े आग़ उसकी ज़्यादा ह़क़दार है
*📚 इह़याउल उलूम, जिल्द 02, सफ़ह 90*
जो शख़्स इस बात की परवाह नहीं करता कि उसने कहां से माल कमाया है तो अल्लाह तआला को इस बात की परवाह नहीं कि वोह उसे जहन्नम के किस दरवाज़े से दाखिल करेगा।
*📚 इह़याउल उलूम, जिल्द 02, सफह 90*
बैतुल मुक़द्दस पर अल्लाह का एक फरिश्ता है जो हर रात निदा (आवाज़) देता है कि जिसने ह़राम खाया उसके ना नफ़्ल क़ुबूल हैं ना फ़र्ज़
*📚 طبقات الشافعیۃ الکبریٰ جلد 06 صفحہ 313*
आज अक्सर लोग जो बाजार (market) में किसी से भी गोस्त खरीद लेते है तहकीक नहीं करते यानी जांच पड़ताल नहीं करते कि वहाबी, देवबंदी, शिया, या कोई बदमजहब तो नहीं है क्योंकि बदमजहब का ज़बीहा हराम है आज अगर गोश्त खरीदने जाए तो सुन्नी यानि इस दौर में मसलक ए आला हज़रत के मानने वाले से गोस्त खरीदे और ये भी देखे कि जबिहा का तरीका अच्छी तरह से जनता है या नहीं यानि ज़बीहा कि दुआ बहुत लोग कुछ भी पढ़ देते है जो लोग कमाने बाहर जाते है या भारत (india) हो या सऊदी या कोई भी देश (country) हो वहा जाएं तो गोश्त कही से भी नहीं खरीदे पहले जांच करे सुन्नी है या नहीं फिर उसके बाद खरीदे नहीं तो खुद ज़बह करें। और अगर हलाल गोश्त ना मिले तो सब्र करें अल्लाह रब्बुल इ़ज़्ज़त आपको इसका बेहतर सिला अता फ़रमायेगा।
और अगर कुछ दिनो तक़ गोश्त खाने को ना भी मिले तो गोश्त ना खाने से मर थोड़ी जाओगे, हलाल रिज़्क कमाओ हलाल रिज़्क खाओ हलाल गोश्त खाओ तो दुआ या नमाज़ या कोई भी इ़बादत क़बूल होगी और कोई भी दीनी बात या ओलमा ए इकराम के बयानात असर करेंगे अल्लाह तबारक ता,आला हुजूरﷺ के सदक़े हलाल रिज़्क खाने कि तौफीक़ अता फ़रमाए (आमीन)
*ऐश करलो यहां मुन्किरों चार दिन*
मर के तरसोगें इस ज़िन्दगी के लिए
*मसलक ए आला हज़रत पे क़ाइम रहों*
ज़िन्दगी दी गई है इसी के लिए
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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