सऊदी (वहाबी) हुकूमत बुज़ुर्गो कि गुस्ताख़
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*🥀 सऊदी (वहाबी) हुकूमत बुज़ुर्गो कि गुस्ताख़ 🥀*
🔛 वहाबी ने सबसे पहले हुकूमत में आते ही हज़रते सहाबा की मुकद्दस क़बरो को ढाया ,,उलमा ने आवाज़ उठाई तो जाहिल गवार झोला छापो ने ये उनपे ही फिरका वारिअत का इल्जाम लगा दिया ,, वहाबी ने 50 हजार से ज्यादा मुसलमानो को क़त्ल करके हुकूमत हासिल की थी किसी एकता के पुजारी ने सवाल नही किया के वहाबी तूने मुसलमान को क़त्ल करने की हिम्मत कैसे की,,
वहाबी ने किसी को नही बख्सा औलिया , से लेकर अम्बिया तक ओर हुज़ूर सल्ललाहु अलेह वासल्लम तक सबकी शान में गुस्ताख़ी की यहा तक अल्लाह तआला की भी गुस्ताख़ी की ,,लेकिन किसी की आंखे नही खुल रही हे ,,सबको पता हे ,इनकी किताबो में गुस्ताखी हे ,,फिर भी चंद पिलपिले टमाटर एकता कि बासुरी लेके सारे पाप को छुपा लेते हे और खुद भी गुमराह हो रहे है, ओर अवाम को भी गुमराह कर रहे हे
इराक़ ,सीरिया , में 15 लाख मुसलमान मारे गए ,,जिसमे से 80 % वहाबी तंज़ीम ISISI ने मारे बाकी अमेरिका और रूस के हमले में मरे , पाकिस्तान में छोटे छोटे बच्चों को गोली से भून दिया गया उनकी आंखों तक मे गोली मारी गई,,दाता गंज बख्स अली हुजवेरी अलेह रहमा के मज़ार पे सुसाइट बोमर भेजा गया जिसमें कई लोग मारे गए ,, हज़रत खालिद इब्ने वालिद रादिअल्लाहु तआला अन्हो के मज़ार को बोम से उड़ाया ,,हज़रते जैनब सलामउल्लाह अलेहा के मज़ार पे बोम लगाया,, 150 से जादा औलिया के मज़ार को बोम से उड़ाया , 7 अम्बिया के मज़ार उड़ाए ,, 14 मस्ज़िद जो मज़ार के पास बनी थी बोम से उड़ा दिया ,,ये सब पिछले 25 से 35 सालों में हुवा कोई पुरानी बात नही कर रहा हु ।। लेकिन फिर भी हमारे पिलपिलो की आंखे नही खुल रही हे,, वहाबी ने पूरी दुनिया मे इस्लाम को बदनाम करदिया लेकिन पिलपिलो को आज भी वो मुसलमान ही नज़र आ रहे हे
तुम जैसे लोग यज़ीद के दौर में होते तो उसके पीछे नमाज़ पढ़ लेते ये कहकर की वो भी तो मुसलमान हे कलमे का शरीक हे शैतान ने तुम्हे इतना निकम्मा बना दिया हे कि तुम, आज जुल्म देखकर भी समझ नही रहे हो ,,
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कितनी दलील दे, कैसी दलील दे, और कहा से दलील दे, तुमने कुछ नही सुन्ना हे तुम्हे तो दुनिया के खोफ ने इतना नफसी गुलाम बना रखा हे ,की आज दुनिया का डर दिखा दिखा के तुम मुनाफ़िक़ और ख़ारजी को भी एक करने की बात कर रहे हो ,, और सुनो कायरो तुम जो एक होने की बात कहते हो वो दुनिया के खौफ से कहते हो ,,तुम्हे डर सता रहा हे कही ऐसा ना हो हमे इस मुल्क से निकाल दिया जाए ,,या हमे क़त्ल कर दिया जाए ,अगर तो नही ऐसी बात तो बताओ कौनसे इस्लाम मे मुनाफ़िक़ के पीछे नमाज़ होती हे ,, कौनसे इस्लाम मे गुस्ताख़ से दोस्ती होती हे, उनकी हिमायत होती हे ,,तुमने मोहम्मदे अरबी सल्लल्लाहु तआला अलेह वासल्लम के इस्लाम को समझा ही नही ,,तुमने मोला अली रादिअल्लाहु तआला अन्हो के रास्ते को पढ़ा ही नही ,,वरना आज तुम भी मोला अली रादिअल्लाहु तआला अन्हो की तराह इन खुवारीज़ कुत्तो से जंग करते इनको एक करने की बात नही करते,,
बड़े बड़े दावे करने वाले जाहिल आज हमे बोलते हे , मदीने के इमाम के पीछे नमाज़ तुम क्यू नही पढ़ते ,वहां इतना सवाब हे , अरे जाहिल सवाब तब हे जब इमाम ईमान वाला होगा ,गुस्ताख़ के पीछे नमाज़ ही नही होगी तो सवाब कहा से होगा ,,ओर तुझे शक़ हे तो खुद पढ़ले किताबे ओर इनके खुवारीज़ वाले अक़ीदे ,,लेकिन नही पड़ेंगे , ओर नाही तहक़ीक़ करने की कोसिस करेंगे ,,
किया हज़रत अली रादिअल्लाहु तआला अन्हो को नही पता था कि मस्जिदे नबवी में नमाज़ का कितना सवाब हे क्यू आपने ओर दीगर सहाबा ने हज़रत उस्मान ए गनी की शहादत के बाद 3 दिन तक मस्ज़िदे नबवी के इमाम के पीछे नमाज़ नही पड़ी थी ,,
आज 100 साल हुवे जिनको अरब में आये हुवे ,,पिलपिले समझ रहें है की यही दीन है जो, सऊदी वाले कर रहे है,,कुछ अक़्ल के दुश्मन ,,तो इतने जोश में कहते हे कि ,अल्लाह पाक किया काबे में मुश्रिकों को रख सकता हे ,,अरे नादानों ये उसूल तुमने कहा से लिया और शैतान कहा मिला जो तुम्हे इतनी आला दर्जे की दलील दे कर गया ,,100 साल से काबे की इमामत करने वाले वहाबी हक़ पे हे ,तो बताओ 700 साल तक काबे के इमाम कितने हक़ वाले होंगे ,,अहले सुन्नत ने तो 700 साल तक काबे में खिदमत की और इन्शा अल्लाह एक वक़्त के बाद फिर अहले सुन्नत होंगे,, अब बता तेरे उसूल से भी वहाबी का हक़ होना साबित नही हुवा,, और अल्लाह ना करें कल अगर सिया ने हुकूमत करली तो फिर तेरे उसूल का किया होगा ,, ओर इससे पहले भी हुकूमत रही, मुनाफ़िक़ की तारीख को पढ़ो ओर अपनी अक़्ल पे मातम करो ।
वहां खोले गए , जुवे के अड्डे नज़र नही आए, वहा के सिनेमा हॉल नज़र नही आए , वहा वहाबियो के बने अय्यासी के अड्डे नज़र नही आते ,, जो खुल्लम खुल्ला दलील के साथ मौजूद हे वीडियो की सक्ल में ,, अगर वो अरब में है तो हक़ पे है ,तो उनके बनाए हुवे ये अय्याशी के अड्डे भी सही होना चाहिए , किया बोलते हो सोचा तो करो ,, इस्लाम के उसूल से फैसला करो , खुद के उसूल से नही ,,शरीयत को मानो ,तबियत को नही ,, तुम्हारी तबियत और दिमाग तो कल ये भी कह सकता है कि अरब में शैतान नही बरगला सकता लिहाज़ा वहा सब गुनाह से पाक और मासूम है (माज़अल्लाह)
याद रखों शैतान कही भी किसी को भी बहका सकता हे ,,अबु जेहल भी अरब का ही था ,, उकबा ओर शेबा , वईद बीन मुगीरा, भी अरब का ही था हिंदुस्तान का नही था , ओर सुनो काबे में कई साल तक बुत रहें, अब ईमानदारी और वफादारी से थोड़ा भी रिश्ता हो तो बताओ तुम्हारे उसूल से इनका भी माजअल्लाह हक़ होना साबित हो सकता हे या नही ,,
तुम्हे समझ नही आती ,,अरे कपड़े अच्छे ब्रांड के पहनते हो चश्मा भी देख भाल के लेते हो , कपड़े पहनने से लेकर खाने तक जितनी मेहनत ओर तहक़ीक़ करते हो अच्छी चीज खरीदने में उतनी ही मेहनत, तहक़ीक़, इमाम के अक़ीदे की भी करलो नमाज़ से पहले ,,की कही गुश्ताख तो नही है ,,बद अक़ीदा तो नही है , अहले बेत का दुश्मन तो नही है ,सहाबा को गाली देने वाला तो नही है,, ओर बिना इतनी तहक़ीक़ किये आंख बंद करके पढ़ने वालो याद रखना तुम सिर्फ ना-दानी अनजाने की वजह से बच नही पाओगे इस लिए की इनके कुफ्र गुस्ताखियां खुली हुई है और तुम्हे बता भी दी गई है ,,अब ये बहाना नही चलेगा कि अनजान में गलती से पढ़ ली थी
*👉 बुरा लगा हो तो लगता रहें लेकिन आज हक़ बोलना ज़रूरी है।*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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