फतहे_मक्का
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 फतहे_मक्का 🥀* मक्के में अबू सुफियान बहुत बेचैन था,"आज कुछ होने वाला है"( वो बड़बड़ाया) उसकी नज़र आसमान की तरफ बार बार उठ रही थी- उसकी बीवी"हिन्दा" जिसने हज़रत अमीर हम्ज़ा रदी का कलेजा चबाया था उसकी परेशानी देखकर उसके पास आ गई थी, क्या बात है? क्यूं परेशान हो? हूं? अबू सुफियान चौंका - कुछ नहीं- तबीयत घबरा रही है मैं ज़रा घूम कर आता हूं,वो ये कहकर घर के बैरूनी दरवाज़े से बाहर निकल गया मक्के की गलियों में घूमते घूमते वो उसकी हद तक पहुंच गया, अचानक उसकी नज़र शहर से बाहर एक वसी(बड़े) मैदान पर पड़ी, हज़ारों मशालें रौशन थीं, लोगों की चहल पहल उनकी रौशनी में नज़र आ रही थीं और भिनभिनाहट की आवाज़ थी जैसे सैकड़ों लोग धीमी आवाज़ में कुछ पढ़ रहे हों उसका दिल धक से रह गया था- उसने फ़ैसला किया कि वो क़रीब जाकर देखेगा कि ये कौन लोग हैं, इतना तो वो समझ ही चुका था कि मक्के के लोग तो ग़ाफीलों की नींद सो रहे हैं और ये लश्कर यक़ीनन मक्के पर चढ़ाई के लिए ही आया है वो जानना चाहता था कि ये कौन हैं? वो आहिस्ता आहिस्ता ओट लेता उस लश्कर के काफी क़रीब पहुंच...